तूफानों से लड़ कर जब पहुंचे हम किनारे, तो पता चला के वो कश्ती मेरी ना थी। तूफानों से लड़ कर जब पहुंचे हम किनारे, तो पता चला के वो कश्ती मेरी ना थी।
तो उस ज़मीन की दरारें भर सी जाती है। तो उस ज़मीन की दरारें भर सी जाती है।
मैं स्त्री जो ठहरी, मुझे किसी बात का बुरा नहीं लगता। मैं स्त्री जो ठहरी, मुझे किसी बात का बुरा नहीं लगता।
उम्र ढल गई तो क्या हुआ अभी भी साँसें बाकी हैं, जीवन पथ पर चल रहे हैं मौत से बाजी नही उम्र ढल गई तो क्या हुआ अभी भी साँसें बाकी हैं, जीवन पथ पर चल रहे हैं मौ...
गुज़र रहे हैं दिन बीत रही हैं रातें बीती जा रही है जिन्दगी तुम बिन सजन ! गुज़र रहे हैं दिन बीत रही हैं रातें बीती जा रही है जिन्दगी तुम बिन सजन ...
कुछ कदम एक ही जगह कब से ठहरे हुए है कुछ आँसुओं की बूंदें कुछ उखड़ती हुई सी सांसें और ... कुछ कदम एक ही जगह कब से ठहरे हुए है कुछ आँसुओं की बूंदें कुछ उखड़ती ह...